कल्पनापूरा संग्रह

रचना 237 / 789

हम तुम गलत पता, गलत शहर ,गलत नाम वाले लोग हैं जो सही रूह,सह…

हम तुम गलत पता, गलत शहर ,गलत नाम वाले लोग हैं जो सही रूह,सही आंखों और सही चेहरे तक पहुंच ही जाते हैं। हमारा मिलना अलभ्य सही पर मिलकर रहना ईश की मर्ज़ी है। लगाकर देखिए जुगत.... न लिख पाएंगे न मिटा ही पाएंगे...नाम हम तुम ऊपर से छप कर आए प्रेमिल लोग हैं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह