कभी सोचती हूं क्यों लिखती हूं
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कभी सोचती हूं क्यों लिखती हूं ? कौन आराम पाता है पढ़ कर? किसको पहुंचते हैं ये शब्द? कौन मेरा नाम लेकर होंठ काटता होगा? कौन बस रो देता होगा ? कौन मुस्कुरा कर बस आंख मूंद लेता होगा? कौन पढ़कर बातें बनाता पकाता होगा? कौन बस पागल कहकर नकार देता होगा? कौन बस हंस कर उड़ा देता होगा मजाक? ईश्वर तुम मुझे हिसाब देना । जब मैं उदास किसी रोज तेरे घुटनों में सर रख दूंगी।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह