कल्पनापूरा संग्रह

रचना 239 / 789

अब तुम याद नहीं आते

अब तुम याद नहीं आते.... तुम्हारी उस पुरानी छब को याद करती हूं जिसे कह पाती थी... रूह देखी है कभी? तुम मिट गए .... मेरी रूह चिपकी है अभी। रहे हमेशा तुम पर। विदा...

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह