चुप रहते हो तो अक्षर भी मुचडे से लगते हैं ।
✣
चुप रहते हो तो अक्षर भी मुचडे से लगते हैं । बोल लेते हो तो रेशमी बातों पर इस्त्री हो जाती है। नज़्म तैरती है ... किस्सों पर टांके लगते जाते हैं। एक कहानी सुनहरी किनारे वाला दुपट्टा ओढ़ लेती है। तुम कहा करो। *संजोया कुछ भी हो प्यारा लगने लगता है...फिर चाहे वो प्रेम हो या अप्रेम
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह