कल्पनापूरा संग्रह

रचना 258 / 789

पतझड़ में हवा में उड़ते नाचते इन आज़ाद पत्तों को देखती हूँ तो…

पतझड़ में हवा में उड़ते नाचते इन आज़ाद पत्तों को देखती हूँ तो लगता है प्रेम भी ठीक ऐसे ही रक्स करता है उदासी में बदहवास बेलौस रंग भरी मृत्यु मुबारक मुझे

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह