बादल पर पांव है
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बादल पर पांव है.... अभी बाज़ार को जाते वक्त पहाड़ी बादल मिले। मैंने कहा बरसो... छिटपुट बरस भी गए। जो प्रेम में मन समझ ले उस से लिपटना बनता है। लिपट गई।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
बादल पर पांव है.... अभी बाज़ार को जाते वक्त पहाड़ी बादल मिले। मैंने कहा बरसो... छिटपुट बरस भी गए। जो प्रेम में मन समझ ले उस से लिपटना बनता है। लिपट गई।