नम्रता आपको बाहर से आर्द्र और भीतर से जल करती जाती है।
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नम्रता आपको बाहर से आर्द्र और भीतर से जल करती जाती है। आप बाहर से लोगों को जल ही दिखते हो पर भीतर गहरे में आप जल की तीनों अवस्थाओं को साध चुके होते हो। आपकी विनम्रता इन्हीं तीन अवस्थाओं का परिणाम और प्रमाण है। आप अय्यार हो जाते हो बहते ,उड़ते ,जमते आपका प्रारूप कोई माप नहीं पाता। बस इस लिए आप दिग्भ्रमित करते हुए सबको पाश में ले आते हो। बंध जाते हैं लोग भीतर बाहर से। नम्रता सबसे मीठा द्रव है इसे पोसा परोसा जाना चाहिए। खुद को खुद से खुद में सबके लिए
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह