कल्पनापूरा संग्रह

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मेरी लौट का पता कोई दर नहीं

मेरी लौट का पता कोई दर नहीं .... एक रूह है जो बैठी है मेरे सीने में इस आनंद को लिखना संभव नहीं ... पढ़ना तो लगभग असंभव है । ठीक जैसे सागर में सीप तो फिर भी मिल जाता है ... वो बूंद नहीं मिल सकती ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह