कल्पनापूरा संग्रह

रचना 316 / 789

तुम्हारे लिए मैंने अपना कोई संस्करण नहीं रखा।

तुम्हारे लिए मैंने अपना कोई संस्करण नहीं रखा। तुमको लेकर मुझे खुद में न शुद्धि की दरकार है न अशुद्धि की। रख लो....मुझे जैसे तुम को रखा ..... निर्विकार

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह