कल्पनापूरा संग्रह

रचना 358 / 789

हँसती हुई स्त्री दुनिया में बेहद कम आँखों को बख्शी गयी हैं

हँसती हुई स्त्री दुनिया में बेहद कम आँखों को बख्शी गयी हैं ... उन ज्यादा आँखों को शिफ़ा पहुंचे।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह