कल्पनापूरा संग्रह

रचना 359 / 789

हमेशा कहा

हमेशा कहा आज फिर कहूंगी हम बेहद सलीके से बने दो लोग हैं प्रेम में खो जाते हैं उदासी में मिल जाते हैं। 💕

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह