हम दुखते हैं संग बस इस लिए प्रेमी हैं *अब कुछ दिनों के लिए विदा। आती हूं।
रचना 377 / 7897 जून 2024हम दुखते हैं संग✣हम दुखते हैं संग बस इस लिए प्रेमी हैं *अब कुछ दिनों के लिए विदा। आती हूं।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह