कल्पनापूरा संग्रह

रचना 377 / 789

हम दुखते हैं संग

हम दुखते हैं संग बस इस लिए प्रेमी हैं *अब कुछ दिनों के लिए विदा। आती हूं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह