कल्पनापूरा संग्रह

रचना 506 / 789

तुम मेरे प्रिय हो

तुम मेरे प्रिय हो.... तुम गुम हो सकते हो मुझमें मैं तुम्हारे प्रेम को इससे नहीं महसूस करती कि तुम मेरे साथ क्या हो बल्कि इससे करती हूँ कि मैं तुम्हारे साथ क्या हूँ। मैं .....उर्वरा मिट्टी हूँ । तुम छिप सकते हो फूट सकते हो उग सकते हो खिल सकते हो एक रोज़ गुम हो सकते हो मुझमें तुम्हारी सुगंध और छाया में मेरी आत्मछवि नहीं बदलेगी मेरे प्रिय

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह