कल्पनापूरा संग्रह

रचना 527 / 789

तुम मेरी अकारण विवशता का एकमात्र कारण हो l

तुम मेरी अकारण विवशता का एकमात्र कारण हो l मेरे लिए प्रेम यही है। यहीं है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह