कल्पनापूरा संग्रह

रचना 529 / 789

खुल कर बता देते तो समेट लेती ये ख़ामोशी

खुल कर बता देते तो समेट लेती ये ख़ामोशी इन आँखों से शब्दों का इंतज़ार ढोया नहीं जाता छलक जाती हैं चुप्पियां l शुभरात💐💐

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह