खुल कर बता देते तो समेट लेती ये ख़ामोशी
✣
खुल कर बता देते तो समेट लेती ये ख़ामोशी इन आँखों से शब्दों का इंतज़ार ढोया नहीं जाता छलक जाती हैं चुप्पियां l शुभरात💐💐
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
खुल कर बता देते तो समेट लेती ये ख़ामोशी इन आँखों से शब्दों का इंतज़ार ढोया नहीं जाता छलक जाती हैं चुप्पियां l शुभरात💐💐