कल्पनापूरा संग्रह

रचना 530 / 789

तुम्हारे साथ जाना कि दिल दो होते हैं

*तुम्हारे साथ जाना कि दिल दो होते हैं.... एक धड़कने वाला ... दूजा चुप रहने वाला। *तुमने जताया कि कहना बेहद मामूली चीज़ है ।सब कहते हैं। तुम चुप सुंदर लगती हो। *पा लेना और पाने के बीच की कशमकश फ़िज़ूल है ... प्रेम के बावन पत्तों में सब पर हाँ लिखा है हमने। चुप्पी ऑप्शन नहीं illusion है हमारा। *प्रेम बरसों में नापा जाता है। पिछले कई और अगले सभी महीने ....तुम तक ... बस तुम तक छपा कर रख दिए हैं मैंने। *तुम से क्या कहूँ.... क्या मांगू? "ईश्वर मेरा मन तुममें कब का लगा चुका है। " वो देना वो दिलाना जानता है। तुम मिल जाते हो मुझे... बेहिसाब ना मिलकर भी। शुभदिन 💕 यू जिंदगी

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह