कल्पनापूरा संग्रह

रचना 540 / 789

अपनी धूप अपने लिए बचा कर रखिए l

अपनी धूप अपने लिए बचा कर रखिए l बारिश बाहर नहीं भीतर होती है बहुत। *तस्वीर कल मीठी धूप की है।आज तो मौसम दिन भर रूआंसा रहा।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह