कल्पनापूरा संग्रह

रचना 541 / 789

साल भर की उपलब्धि ये रही कि

साल भर की उपलब्धि ये रही कि तुम रहे मैं रही और ये प्रेम रहा निर्बाध बीते पर बीते नहीं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह