कल्पनापूरा संग्रह

रचना 543 / 789

मत सुनो उसे

मत सुनो उसे दुनिया बोलती है कितना सारा झूठ बल्कि देखो उसे दुनिया को जीते हुए कितना सारा झूठ फिर सच होते हुए कितना सारा सच फिर झूठ होते हुए

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह