कल्पनापूरा संग्रह

रचना 548 / 789

ठंडा चांद भेजा है

ठंडा चांद भेजा है सुलगते इंतज़ार पर धरना कुछ देर मुस्करा लेना।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह