कल्पनापूरा संग्रह

रचना 550 / 789

मेरा वाला चाँद

मेरा वाला चाँद कभी कड़ाही कभी थाली कभी तवा भी है। अक्सर रसोई वाली औरत की कविता इनमें पकती उबलती उफनती जलती रहती है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह