कल्पनापूरा संग्रह

रचना 551 / 789

अपने काफ़िर को दिल बक्श दिया है हमने

अपने काफ़िर को दिल बक्श दिया है हमने अलग किस्म के आवारा लोग हैं । कुछ अलग किस्म की हमारी आवारगी ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह