कल्पनापूरा संग्रह

रचना 557 / 789

तुमसे हमेशा झूठ कहा और तुम्हारी तस्वीर से हमेशा सच।

तुमसे हमेशा झूठ कहा और तुम्हारी तस्वीर से हमेशा सच। आसान होना मुझे ऐसा और इतना ही आता है। मैं प्रेम में पड़ गई हूं । कमजोर पड़ नहीं सकती । और टूटना मुझे आता नहीं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह