कल्पनापूरा संग्रह

रचना 567 / 789

लौट कर फिर फिर आती लहर निर्लज्ज नहीं विवश है।

लौट कर फिर फिर आती लहर निर्लज्ज नहीं विवश है। ठीक जैसे मैं ठीक जैसे मेरा प्रेम ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह