कल्पनापूरा संग्रह

रचना 568 / 789

सम्मान दो प्रकार के होते हैं

सम्मान दो प्रकार के होते हैं... एक जो हम दूसरों की आंखों में खोजते हैं और दूसरा जो हम अपनी आत्मा से पाते हैं। दूसरा पहले से अधिक कठिन, अलभ्य परन्तु अक्षय है जबकि पहला आसान, लभ्य परन्तु क्षणभंगुर । मेरी आत्मा मुस्कुरा दे तुम्हें देख कर कल्पना।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह