तुमको देखती हूं तो मुस्कुरा देती हूं। मेरे लिए यही प्रेम है यही शाश्वत।
रचना 577 / 7894 फ़रवरी 2025तुमको देखती हूं तो मुस्कुरा देती हूं।✣तुमको देखती हूं तो मुस्कुरा देती हूं। मेरे लिए यही प्रेम है यही शाश्वत।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह