कल्पनापूरा संग्रह

रचना 578 / 789

प्रतीक्षा एक मिटती बनती मुस्कान है

प्रतीक्षा एक मिटती बनती मुस्कान है... आंखों में बनती है होठों पर मिट जाती है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह