कल्पनापूरा संग्रह

रचना 595 / 789

तुम्हें कितना कुछ पता था

तुम्हें कितना कुछ पता था चिड़िया,पहाड़,फूल ,पत्ते, रेत ,हवा कागज़ , दिल और उंगलियों के बारे में । मुझे बस तुम याद थे इन सब को याद करते हुए। प्रेम लिखना ही नहीं प्रेम मिटा देना भी प्रेम ही है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह