कल्पनापूरा संग्रह

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तुम पर इस लिए भी प्यार आता है कि तुम इक ऊब लिए घंटों बैठे…

तुम पर इस लिए भी प्यार आता है कि तुम इक ऊब लिए घंटों बैठे रहते हो। मुस्कुराते हो। उस पर किस्से कहानियां गढ़ लेते हो। अधिक व्याकुल होने पर उसे कविता में ढाल लेते हो। जब ऊब दुखने लगती है तो उलाहने देकर फिर उसे नया कर देते हो। सच कहूं तुम्हें चूमने का मन करता है जब तुम मुझसे ऊब कर फिर मेरी ही ऊब को जाने अनजाने पुकारते हो । आ जाओ कहते हो। प्रेमी तुम ऊब मैं

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह