ना चाहते हुए भी हम दोनों ने अपने बीच एक ऐसा एकांत उगा लिया…
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ना चाहते हुए भी हम दोनों ने अपने बीच एक ऐसा एकांत उगा लिया है जो शोर से भरा है। इस एकांत के दो छोर हैं ।कभी तुम आवाज नहीं देते ।कभी मैं सुन नहीं पाती। शोर इन दोनों की असमर्थता की दारुण चीख है जो चुप की भाषा बोलती है। प्रेम तुम्हारा दिया शून्य है ।तुमसे लग कर अनंत मैं ही बन सकती हूं।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह