कल्पनापूरा संग्रह

रचना 634 / 789

अभी ठीक इस वक्त का अल्मोड़ा... घर से ठीक सामने पूरा शहर दिख…

अभी ठीक इस वक्त का अल्मोड़ा... घर से ठीक सामने पूरा शहर दिखता हुआ। नज़ारा क़ैद करते वक्त मन बोल पड़ा तो वही आवाज़ रिकॉर्ड हो गई। शुभ रात।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह