कल्पनापूरा संग्रह

रचना 635 / 789

मेरी खामोशी तुम्हारी अनुपस्थिति

मेरी खामोशी तुम्हारी अनुपस्थिति से ऊपजी थकान है। ये अनंत विराम हो गई है। कहां धरूं ? कहां न धरूं ये शोर?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह