कल्पनापूरा संग्रह

रचना 637 / 789

तुम आवाज़ देते हो तो रोशनी से भर जाती हूं

तुम आवाज़ देते हो तो रोशनी से भर जाती हूं ध्वनि से नहीं । तस्वीर पुरानी , शब्द पुराने, मैं पुरानी तुम भी पुराने बस याद इस पल नई नवेली है। शुक्रिया।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह