कल्पनापूरा संग्रह

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खामोश दस्तकें

खामोश दस्तकें खामोश चिठ्ठियाँ खामोश अर्जियां खामोश चाहनाएँ खामोश इशारे खामोश कहानियां खामोश कल्पनाएं खामोशी से बेहतर कौन अपने को खामोश करना जानता है। खामोशियाँ रूमानी हैं। आंखों के सामने से गुजरनी चाहिए.....दिल के ठीक बीचों बीच रुके हुए तीर को छूती हुई और लिखी जानी चाहिए बड़बोले कागज़ पर । इश्क़ मुकम्मल रहे खामोशियों में ... फ़िज़ूल है कह देना। आगे से मत कहना कल्पना। रूबरू वाले फासले से रखे हैं तुमसे है कितना कुछ पर कहा नहीं है तुमसे।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह