कल्पनापूरा संग्रह

रचना 658 / 789

इंतजार सबके हिस्से आता है

इंतजार सबके हिस्से आता है... किसी का खिल जाता है। किसी का खल जाता है। मेरी आंखों में रेत की नदी बहती है और तुम्हारी में? शायद पहाड़ी नदी कोई।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह