इंतजार सबके हिस्से आता है
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इंतजार सबके हिस्से आता है... किसी का खिल जाता है। किसी का खल जाता है। मेरी आंखों में रेत की नदी बहती है और तुम्हारी में? शायद पहाड़ी नदी कोई।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह
इंतजार सबके हिस्से आता है... किसी का खिल जाता है। किसी का खल जाता है। मेरी आंखों में रेत की नदी बहती है और तुम्हारी में? शायद पहाड़ी नदी कोई।