कल्पनापूरा संग्रह

रचना 679 / 789

पुरानी तस्वीर में नए हम छिपे होते हैं और नई तस्वीर में पुरा…

पुरानी तस्वीर में नए हम छिपे होते हैं और नई तस्वीर में पुराने हम । देखना कभी गौर से उसको तस्वीर को नहीं

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह